Soil Microorganisms and Their Role in Organic Agriculture

मिट्टी के सूक्ष्मजीव और ऑर्गेनिक खेती में उनकी भूमिका

खेती में सिर्फ मिट्टी और पौधों का ही नहीं, बल्कि मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) का भी अहम योगदान होता है। ये सूक्ष्म जीव दिखाई तो नहीं देते, लेकिन फसलों की वृद्धि और मिट्टी की उर्वरता के लिए बहुत ज़रूरी हैं। ऑर्गेनिक खेती (Organic Farming) में इन्हें विशेष महत्व दिया जाता है क्योंकि यह खेती रासायनिक खाद पर निर्भर न होकर प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर आधारित है।


1. मिट्टी में पाए जाने वाले मुख्य सूक्ष्मजीव

  1. बैक्टीरिया (Bacteria)
    • नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करते हैं।
    • फॉस्फोरस और पोटाश को घुलनशील बनाते हैं ताकि पौधों को आसानी से मिले।
  2. फंगस (Fungi)
    • जैविक पदार्थों (पत्ते, टहनियाँ, गोबर आदि) को तोड़कर खाद में बदलते हैं।
    • माइकोराइजा फंगस (Mycorrhiza) पौधों की जड़ों के साथ मिलकर उन्हें पोषण देता है।
  3. एक्टिनोमाइसीट्स (Actinomycetes)
    • मिट्टी में ह्यूमस बनाते हैं।
    • कई रोग पैदा करने वाले फफूंद को रोकते हैं।
  4. नीलहरित शैवाल (Blue Green Algae)
    • धान की फसलों में नाइट्रोजन की आपूर्ति करते हैं।
    • पानी वाली खेती के लिए बेहद उपयोगी।
  5. प्रोटोज़ोआ और नेमाटोड्स
    • बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों की संख्या को नियंत्रित करते हैं।
    • मिट्टी में जैविक संतुलन बनाए रखते हैं।

2. ऑर्गेनिक खेती में सूक्ष्मजीवों की भूमिका

  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation):
    राइजोबियम और एज़ोटोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया वायुमंडल की नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूप में बदलते हैं।
  • फॉस्फोरस घुलनशील बनाना (Phosphate Solubilization):
    कुछ बैक्टीरिया फॉस्फोरस को घुलनशील बनाकर पौधों को उपलब्ध कराते हैं।
  • जैविक खाद तैयार करना:
    फंगस और एक्टिनोमाइसीट्स सूखे पत्ते, गोबर और फसल अवशेषों को सड़ाकर बेहतरीन जैविक खाद में बदल देते हैं।
  • मिट्टी की संरचना सुधारना:
    सूक्ष्मजीव मिट्टी को मुलायम और उपजाऊ बनाते हैं, जिससे पानी और हवा आसानी से गुजरती है।
  • कीट और रोग नियंत्रण:
    कुछ लाभकारी बैक्टीरिया और फंगस पौधों में बीमारियाँ फैलाने वाले जीवाणुओं को रोकते हैं।

3. किसान सूक्ष्मजीवों को कैसे बढ़ाएँ?

जैविक खाद (Organic Manure) का प्रयोग करें।
तरल खाद (जैसे जीवामृत, पंचगव्य) नियमित रूप से डालें।
फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएँ।
✔ रसायनों (Urea, Pesticides) का उपयोग कम करें।
✔ खेत में फसल अवशेष और पत्ते सड़ने दें, इन्हें जलाएँ नहीं।


निष्कर्ष

मिट्टी के सूक्ष्मजीव खेती की आत्मा हैं। ये पौधों को पोषण देते हैं, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारते हैं और फसलों को बीमारियों से बचाते हैं। ऑर्गेनिक खेती में इनका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यही प्राकृतिक तरीके से खेती को टिकाऊ और लाभदायक बनाते हैं। यदि किसान सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रखें और उनके अनुकूल माहौल बनाएँ, तो उन्हें कम लागत में अधिक उपज और स्वस्थ फसलें मिलेंगी।