ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़ी गलतफहमियाँ और सच्चाई – हर किसान को जाननी चाहिए
आज जब लोग स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं, तो ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) की चर्चा भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसके साथ कई गलत धारणाएँ (Myths) भी फैल गई हैं। बहुत से किसान यह सोचते हैं कि ऑर्गेनिक खेती कठिन, महंगी या कम लाभदायक है। जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
आइए जानते हैं — ऑर्गेनिक खेती से जुड़ी प्रमुख गलतफहमियाँ और उनके पीछे की सच्चाई।
✅ Myth 1: ऑर्गेनिक खेती से उपज कम होती है
Fact:
शुरुआती 1-2 वर्षों में मिट्टी को खुद को संतुलित करने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन इसके बाद उपज स्थिर और अच्छी हो जाती है।
जैविक खाद और सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।
✅ Myth 2: ऑर्गेनिक खेती बहुत महंगी होती है
Fact:
रासायनिक खाद और कीटनाशक खरीदने की तुलना में, जैविक खेती सस्ती होती है।
क्योंकि किसान गोबर, हरी खाद, नीम खली और रसोई के अपशिष्ट से खुद खाद बना सकते हैं।
इससे बाहरी लागत लगभग 50–70% तक घट जाती है।
✅ Myth 3: ऑर्गेनिक खेती में बहुत समय और मेहनत लगती है
Fact:
शुरुआत में थोड़ी योजना की आवश्यकता होती है, लेकिन बाद में यह कम रखरखाव वाली खेती बन जाती है।
मिट्टी स्वाभाविक रूप से पोषक तत्व पैदा करती है, और रासायनिक स्प्रे की जरूरत नहीं होती।
✅ Myth 4: ऑर्गेनिक उत्पादों की बिक्री कठिन है
Fact:
अब ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है — शहरों, सुपरमार्केट, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और एक्सपोर्ट मार्केट तक।
इसके अलावा, सरकार और निजी कंपनियाँ किसानों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केट लिंकिंग में मदद कर रही हैं।
✅ Myth 5: ऑर्गेनिक खेती केवल बड़े किसानों के लिए है
Fact:
यह एक सस्ती और टिकाऊ खेती पद्धति है जिसे छोटे किसान भी आसानी से अपना सकते हैं।
छोटे क्षेत्र में शुरू करके धीरे-धीरे पूरे खेत को ऑर्गेनिक में बदला जा सकता है।
✅ Myth 6: ऑर्गेनिक खेती केवल खाद बदलने तक सीमित है
Fact:
ऑर्गेनिक खेती एक समग्र प्रणाली (Holistic System) है — इसमें मिट्टी की देखभाल, फसल चक्र, प्राकृतिक कीट नियंत्रण और जल संरक्षण सभी शामिल हैं।
यह सिर्फ खाद नहीं बल्कि खेती के पूरे दृष्टिकोण को बदल देती है।
✅ Myth 7: ऑर्गेनिक खेती में कीट और रोग नियंत्रण मुश्किल है
Fact:
ऑर्गेनिक खेती में कीटों को खत्म करने की बजाय संतुलित पारिस्थितिकी (Eco-balance) बनाई जाती है।
नीम तेल, जीवामृत, और फेरोमोन ट्रैप जैसे प्राकृतिक उपाय बहुत प्रभावी हैं।
✅ Myth 8: ऑर्गेनिक खेती में कोई सरकारी सहायता नहीं है
Fact:
भारत सरकार परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY), राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) और कई राज्य स्तर की सब्सिडी योजनाएँ चला रही है।
इनसे प्रशिक्षण, प्रमाणन और वित्तीय सहायता आसानी से मिल सकती है।
✅ निष्कर्ष
ऑर्गेनिक खेती केवल एक खेती का तरीका नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाने की जीवनशैली है।
यह मिट्टी, पर्यावरण, किसान और उपभोक्ता — सभी के लिए लाभकारी है।
सच्चाई यह है कि ऑर्गेनिक फार्मिंग में न केवल उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि किसान को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता भी मिलती है।
