भारत में अपने खेत के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन (प्रमाणपत्र) कैसे प्राप्त करें – पूरी जानकारी
भारत में ऑर्गेनिक खेती (Jaivik Kheti) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। लेकिन यदि किसान अपने उत्पादों को “Organic Certified” के रूप में बेचना चाहते हैं, तो उन्हें ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन (Organic Certification) लेना आवश्यक होता है। यह प्रमाणपत्र बताता है कि आपकी फसलें बिना रासायनिक खाद या कीटनाशक के, पूरी तरह प्राकृतिक और टिकाऊ तरीकों से उगाई गई हैं।
इस लेख में हम जानेंगे कि भारत में किसान अपने खेत या उत्पाद के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट कैसे प्राप्त कर सकते हैं, उसकी प्रक्रिया, लागत और फायदे क्या हैं।
✅ 1. ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन क्या है?
ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एक सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्था द्वारा दिया गया प्रमाण है कि किसान ने खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्वों का प्रयोग नहीं किया है और खेती के सभी मानक राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के अनुसार किए गए हैं।
यह प्रमाणपत्र उपभोक्ता को यह विश्वास दिलाता है कि उत्पाद पूरी तरह ऑर्गेनिक और सुरक्षित है।
✅ 2. भारत में सर्टिफिकेशन की दो प्रमुख प्रणालियाँ
🟢 (1) NPOP – National Programme for Organic Production
- बड़े किसानों, समूहों या एक्सपोर्ट के लिए उपयुक्त।
- APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) द्वारा संचालित।
- प्रमाणन की प्रक्रिया सर्टिफिकेशन एजेंसी द्वारा की जाती है।
🟢 (2) PGS – Participatory Guarantee System (PGS-India)
- छोटे और मध्यम किसानों के लिए उपयुक्त।
- सरल और कम लागत वाली प्रणाली है।
- किसान समूह मिलकर एक-दूसरे की खेती की जांच करते हैं और प्रमाणित करते हैं।
- PGS India Green (Transition Stage) और PGS India Organic (Full Organic) दो चरणों में प्रमाण मिलता है।
✅ 3. सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)
Step 1: रजिस्ट्रेशन करें
- NPOP के लिए किसी मान्यता प्राप्त एजेंसी (जैसे INDOCERT, ECOCERT, Control Union) में आवेदन करें।
- PGS के लिए www.pgsindia-ncof.gov.in पर ऑनलाइन रजिस्टर करें।
Step 2: खेत का निरीक्षण (Inspection)
- अधिकारी आपके खेत का निरीक्षण करेंगे।
- मिट्टी, पानी और फसल की जानकारी ली जाएगी।
Step 3: ऑर्गेनिक योजना तैयार करें (Organic System Plan)
- किसान को यह बताना होगा कि वे कौन-कौन सी फसलें उगाते हैं, कौन सी खाद और कीटनाशक इस्तेमाल करते हैं, और कौन से जैविक उपाय अपनाते हैं।
Step 4: ट्रांजिशन अवधि (Conversion Period)
- खेत को पूरी तरह ऑर्गेनिक घोषित करने से पहले 2 से 3 साल का परिवर्तन काल (Transition Period) होता है।
- इस दौरान किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता।
Step 5: प्रमाणपत्र जारी होना
- सभी मानक पूरे करने पर किसान को ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट मिलता है।
- यह सर्टिफिकेट 1 वर्ष के लिए मान्य होता है और हर साल नवीनीकृत किया जा सकता है।
✅ 4. ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की लागत
| प्रकार | अनुमानित लागत | उपयुक्त किसानों के लिए |
| NPOP Certification | ₹10,000 – ₹30,000 प्रति वर्ष | बड़े/एक्सपोर्ट किसान |
| PGS Certification | ₹0 – ₹500 (लगभग निशुल्क) | छोटे और समूह किसान |
✅ 5. सर्टिफिकेशन के फायदे
- उत्पाद को प्रीमियम मूल्य मिलता है।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑर्गेनिक मार्केट में प्रवेश मिलता है।
- उपभोक्ताओं का विश्वास और पहचान बढ़ती है।
- सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ आसानी से मिलता है।
✅ 6. जरूरी सुझाव
- हर रिकॉर्ड (खाद, बीज, कीटनाशक, फसल आदि) का लेखा–जोखा बनाए रखें।
- रासायनिक तत्वों से खेत को दूर रखें।
- साझा खेतों में बाड़ या सीमांकन रखें ताकि कोई रासायनिक मिलावट न हो।
- हर साल निरीक्षण करवाना न भूलें।
✅ निष्कर्ष
भारत में ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन प्राप्त करना अब पहले से कहीं आसान है।
PGS प्रणाली छोटे किसानों के लिए सस्ती और सरल है, जबकि NPOP प्रणाली बड़े किसानों और निर्यात के लिए उपयुक्त है।
एक बार प्रमाणपत्र मिलने के बाद किसान अपने उत्पादों को “Certified Organic” के रूप में बेच सकते हैं और उन्हें बाजार में बेहतर दाम भी मिलते हैं।
