Organic Inputs Required for Seedling and Nursery Management

नर्सरी और पौध तैयार करने के लिए आवश्यक जैविक इनपुट

जैविक पोषण से स्वस्थ, मजबूत और रोगमुक्त पौध तैयार करने की सर्वोत्तम विधियाँ

किसी भी फसल की सफलता की शुरुआत अच्छी और स्वस्थ पौध (Seedling) से होती है। यदि नर्सरी में पौधे कमजोर, पीले या रोगग्रस्त हों, तो खेत में लगाने के बाद भी उनसे अच्छी उपज की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसलिए जैविक खेती में नर्सरी और पौध प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।

इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि नर्सरी में कौनकौन से जैविक इनपुट आवश्यक हैं, उन्हें कैसे और कब प्रयोग करना चाहिए, और किस तरह जैविक पोषण से मजबूत, हरीभरी और स्वस्थ पौध तैयार की जा सकती है।


नर्सरी प्रबंधन में जैविक इनपुट क्यों ज़रूरी हैं?

रासायनिक खाद और दवाइयों से पौध तो जल्दी बढ़ जाती है, लेकिन:

  • जड़ें कमजोर रहती हैं
  • पौधे खेत में जल्दी झुलस जाते हैं
  • रोगों का खतरा बढ़ जाता है

वहीं जैविक इनपुट से:

  • जड़ें गहरी और मजबूत बनती हैं
  • पौध वातावरण के अनुसार ढल जाती है
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

नर्सरी के लिए आवश्यक प्रमुख जैविक इनपुट

1. उत्तम गुणवत्ता की मिट्टी

नर्सरी की मिट्टी हल्की, भुरभुरी और जीवांश से भरपूर होनी चाहिए।

आदर्श मिश्रण

  • 1 भाग खेत की मिट्टी
  • 1 भाग सड़ी हुई गोबर खाद या कम्पोस्ट
  • 1 भाग बालू या कोकोपीट

यह मिश्रण:

  • जल निकास अच्छा रखता है
  • जड़ों को फैलने की जगह देता है

2. सड़ी हुई जैविक खाद (Compost / Vermicompost)

  • ताज़ी गोबर खाद का प्रयोग न करें
  • वर्मी कम्पोस्ट पौध के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है

लाभ

  • धीरे-धीरे पोषक तत्व देती है
  • मिट्टी में लाभकारी जीव बढ़ाती है

3. जैविक बीज उपचार (Seed Treatment)

बीज बोने से पहले जैविक उपचार करना बहुत आवश्यक है।

उपयोगी जैविक पदार्थ

  • बीजामृत
  • ट्राइकोडर्मा
  • गौमूत्र + नीम अर्क

फायदे

  • बीज जनित रोगों से सुरक्षा
  • अंकुरण प्रतिशत बढ़ता है

4. जीवामृत और घन जीवामृत

नर्सरी में तरल जैविक खाद का विशेष महत्व होता है।

कैसे प्रयोग करें

  • बोआई के 7–10 दिन बाद
  • 5–7 दिन के अंतराल पर
  • हल्का छिड़काव या सिंचाई के साथ

लाभ

  • जड़ों की वृद्धि तेज
  • पौध हरी और मजबूत

5. पंचगव्य

पंचगव्य एक शक्तिशाली जैविक पोषक तत्व है।

उपयोग विधि

  • 3% घोल बनाकर
  • 10–12 दिन बाद छिड़काव

फायदे

  • पौध की बढ़वार में तेजी
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

6. जैविक कीट एवं रोग नियंत्रण इनपुट

नर्सरी में रोग लगने का खतरा अधिक होता है।

प्राकृतिक उपाय

  • नीम खली
  • नीम तेल
  • लहसुन-मिर्च का घोल

लाभ

  • बिना नुकसान के कीट नियंत्रण
  • पौध सुरक्षित रहती है

नर्सरी में पानी और पोषण का संतुलन

  • अधिक पानी से जड़ सड़न
  • कम पानी से पौध सूख जाती है

सुझाव

  • हल्की लेकिन नियमित सिंचाई
  • सुबह या शाम का समय बेहतर

नर्सरी में छाया और हवा का प्रबंधन

  • तेज धूप से पौध झुलस सकती है
  • हल्की छाया बहुत ज़रूरी

उपाय

  • जाली या घास से छाया
  • उचित दूरी पर ट्रे या क्यारियाँ

स्वस्थ पौध की पहचान

अच्छी पौध में:

  • तना मोटा और सीधा
  • पत्तियाँ हरी और चमकदार
  • जड़ें सफेद और मजबूत

नर्सरी से खेत में पौध ले जाने से पहले

  • पौध को धीरे-धीरे बाहरी वातावरण का आदी बनाएं
  • रोपाई से 2–3 दिन पहले पानी कम करें
  • कमजोर पौध अलग कर दें

छोटे किसानों के लिए उपयोगी सुझाव

  • घर पर उपलब्ध संसाधनों से जैविक इनपुट बनाएं
  • कम लागत में उच्च गुणवत्ता की पौध तैयार करें
  • नर्सरी में साफ-सफाई रखें

जैविक नर्सरी के फायदे

  • कम लागत
  • स्वस्थ और टिकाऊ पौध
  • खेत में बेहतर उत्पादन
  • रसायन-मुक्त खेती

निष्कर्ष

जैविक खेती की नींव स्वस्थ नर्सरी और मजबूत पौध पर टिकी होती है। यदि नर्सरी में सही जैविक इनपुट, संतुलित पोषण और उचित देखभाल की जाए, तो खेत में फसल की शुरुआत ही मजबूत होती है।

याद रखेंमजबूत पौध = बेहतर फसल = स्थायी जैविक खेती। 🌱