जैविक खाद मिट्टी की संरचना और जल धारण क्षमता कैसे सुधारती है
– मृदा कटाव रोकने और सूखे के प्रभाव को कम करने में जैविक पदार्थ की भूमिका
आज के समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती है मिट्टी की बिगड़ती सेहत। लगातार रासायनिक खादों और कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी सख्त, बंजर और कमजोर होती जा रही है। ऐसे में जैविक खाद (Organic Fertilizers / Jaivik Khad) मिट्टी को फिर से जीवित करने का एक प्राकृतिक और टिकाऊ समाधान है। यह न केवल फसलों को पोषण देती है, बल्कि मिट्टी की संरचना सुधारकर उसमें पानी रोकने की क्षमता भी बढ़ाती है।
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि जैविक खाद मिट्टी की संरचना को कैसे बेहतर बनाती है, जल संरक्षण में कैसे मदद करती है और मिट्टी कटाव व सूखे से फसलों की रक्षा कैसे करती है।
मिट्टी की संरचना क्या होती है?
मिट्टी की संरचना का मतलब है मिट्टी के कणों (रेत, गाद और चिकनी मिट्टी) का आपस में जुड़ने का तरीका। जब मिट्टी के कण सही तरीके से जुड़े होते हैं, तो उसमें:
- हवा का संचार अच्छा होता है
- जड़ों को फैलने की जगह मिलती है
- पानी आसानी से अंदर जाता है और देर तक बना रहता है
लेकिन रासायनिक खादों के अधिक उपयोग से मिट्टी सख्त हो जाती है और उसकी प्राकृतिक संरचना नष्ट हो जाती है।
जैविक खाद मिट्टी की संरचना कैसे सुधारती है?
1. जैविक पदार्थ मिट्टी को भुरभुरा बनाते हैं
गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट और हरी खाद जैसे जैविक पदार्थ मिट्टी में मिलकर उसे भुरभुरी और नरम बनाते हैं। इससे मिट्टी में दरारें बनती हैं, जिससे:
- पानी आसानी से जमीन में जाता है
- जड़ों को सांस लेने के लिए हवा मिलती है
भुरभुरी मिट्टी में फसल की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधे स्वस्थ रहते हैं।
2. मिट्टी में जीवाणुओं और केंचुओं की संख्या बढ़ती है
जैविक खाद मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं और केंचुओं का भोजन होती है। ये सूक्ष्म जीव:
- मिट्टी को अंदर से ढीला करते हैं
- जैविक पदार्थ को पौधों के लिए पोषक तत्वों में बदलते हैं
केंचुए मिट्टी में सुरंग बनाते हैं, जिससे जल निकासी और जल संग्रह दोनों बेहतर होते हैं।
जल धारण क्षमता बढ़ाने में जैविक खाद की भूमिका
3. मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है
जैविक खाद में मौजूद कार्बनिक पदार्थ स्पंज की तरह काम करते हैं। ये:
- पानी को सोखते हैं
- जरूरत पड़ने पर धीरे-धीरे पौधों को उपलब्ध कराते हैं
इससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और पानी की बचत होती है।
4. सूखे के समय फसलों को सुरक्षा
जब बारिश कम होती है या सूखे की स्थिति होती है, तब जैविक खाद से समृद्ध मिट्टी:
- लंबे समय तक नमी बनाए रखती है
- पौधों को तनाव से बचाती है
ऐसी मिट्टी में उगी फसलें सूखे को बेहतर ढंग से सहन कर पाती हैं।
मिट्टी कटाव रोकने में जैविक खाद कैसे मदद करती है?
5. मिट्टी के कणों को आपस में बांधती है
जैविक पदार्थ मिट्टी के कणों को जोड़कर मजबूत संरचना बनाते हैं। इससे:
- तेज बारिश में मिट्टी बहती नहीं
- हवा से उड़ने वाली मिट्टी कम होती है
यह खासतौर पर ढलान वाली जमीन और हल्की मिट्टी के लिए बहुत फायदेमंद है।
6. पौधों की जड़ें मिट्टी को मजबूती देती हैं
जैविक खाद से पौधों की जड़ें गहरी और मजबूत बनती हैं। मजबूत जड़ें:
- मिट्टी को पकड़कर रखती हैं
- कटाव और भूमि क्षरण को रोकती हैं
इससे खेत की उपजाऊ मिट्टी सुरक्षित रहती है।
रासायनिक खाद बनाम जैविक खाद: मिट्टी पर प्रभाव
| विषय | रासायनिक खाद | जैविक खाद |
| मिट्टी की संरचना | सख्त बनाती है | भुरभुरी बनाती है |
| जल धारण क्षमता | कम होती है | अधिक होती है |
| सूक्ष्म जीव | नष्ट होते हैं | बढ़ते हैं |
| दीर्घकालीन प्रभाव | मिट्टी कमजोर | मिट्टी उपजाऊ |
किसानों के लिए व्यावहारिक सुझाव
- हर फसल चक्र में गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट अवश्य डालें
- हरी खाद (सनहेम्प, ढैंचा) को खेत में मिलाएं
- जैविक खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं, ऊपर न छोड़ें
- नियमित रूप से जैविक पदार्थ जोड़ते रहें
निष्कर्ष
जैविक खाद केवल पौधों का भोजन नहीं है, बल्कि यह मिट्टी का जीवन है। यह मिट्टी की संरचना को सुधारकर उसे भुरभुरा, उपजाऊ और जल-संरक्षण योग्य बनाती है। साथ ही, मिट्टी कटाव को रोकती है और सूखे के प्रभाव को कम करती है।
अगर किसान लंबे समय तक अच्छी पैदावार, कम लागत और स्वस्थ जमीन चाहते हैं, तो जैविक खाद अपनाना आज की नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत है।
