तरल जैविक खाद कैसे बनाएं: जीवामृत और बीजामृत
खेती में जैविक खाद का महत्व सभी जानते हैं। ठोस जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद तो आम हैं, लेकिन तरल जैविक खाद (Liquid Organic Fertilizers) भी उतनी ही उपयोगी है। यह पौधों को जल्दी पोषण देती है और उनकी वृद्धि को तेज करती है। भारत में किसान दो खास तरह की तरल खाद बनाते हैं – जीवामृत (Jeevamrut) और बीजामृत (Beejamrut)। आइए जानते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है और इनके क्या फायदे हैं।
✅ 1. जीवामृत (Jeevamrut) क्या है?
जीवामृत एक तरल जैविक खाद है जो गाय के गोबर, गोमूत्र, दाल का आटा और गुड़ से तैयार होती है। यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाती है और पौधों की जड़ों तक पोषण पहुँचाती है।
🔹 जीवामृत बनाने की विधि:
सामग्री (100 लीटर के लिए):
- ताजा गाय का गोबर – 10 किलो
- गाय का गोमूत्र – 10 लीटर
- बेसन/चना दाल का आटा – 2 किलो
- गुड़ – 2 किलो
- मिट्टी (खेत की) – 1 मुट्ठी
- पानी – 100 लीटर
बनाने की प्रक्रिया:
- एक बड़े ड्रम या टंकी में पानी भरें।
- इसमें गोबर, गोमूत्र, बेसन और गुड़ मिलाएँ।
- अच्छी तरह लकड़ी के डंडे से हिलाएँ।
- इसे छायादार जगह पर ढककर 5–7 दिन तक रखें।
- दिन में 2–3 बार हिलाएँ ताकि किण्वन सही से हो।
प्रयोग:
- 1 एकड़ खेत में 200 लीटर जीवामृत पर्याप्त है।
- इसे सिंचाई के पानी के साथ या छिड़काव (Spray) के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
✅ 2. बीजामृत (Beejamrut) क्या है?
बीजामृत एक तरल जैविक घोल है जिसका उपयोग बीज उपचार (Seed Treatment) के लिए किया जाता है। यह बीज को फफूंद और कीटों से बचाता है तथा अंकुरण क्षमता बढ़ाता है।
🔹 बीजामृत बनाने की विधि:
सामग्री:
- ताजा गाय का गोबर – 5 किलो
- गाय का गोमूत्र – 5 लीटर
- चूना – 50 ग्राम
- मिट्टी (खेत की) – 1 मुट्ठी
- पानी – 20 लीटर
बनाने की प्रक्रिया:
- एक बाल्टी में पानी लें।
- इसमें गोबर, गोमूत्र और चूना मिलाएँ।
- अच्छे से हिलाकर 12 घंटे तक ढककर रखें।
प्रयोग:
- बीज बोने से पहले 30 मिनट तक बीजों को इस घोल में भिगोएँ।
- फिर छायादार जगह में सुखाकर खेत में बोएँ।
✅ जीवामृत और बीजामृत के फायदे
✔ मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या और क्रियाशीलता बढ़ाते हैं
✔ फसलों की विकास गति और उत्पादन बढ़ाते हैं
✔ बीजों को रोग और कीटों से बचाते हैं
✔ खेती की लागत घटाते हैं
✔ पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण–अनुकूल हैं
✅ निष्कर्ष
जीवामृत और बीजामृत जैसे तरल जैविक खाद किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ का साधन हैं। इन्हें तैयार करना आसान है, और ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ फसलों को भी सुरक्षित और मजबूत बनाते हैं। यदि हर किसान इन्हें अपनी खेती में शामिल करे, तो वह न केवल अच्छी उपज पा सकता है बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को भी स्वस्थ बना सकता है।