जैविक खेती में मिट्टी के pH संतुलन का महत्व
– जैविक इनपुट्स प्राकृतिक रूप से मिट्टी का आदर्श pH कैसे बनाए रखते हैं
जैविक खेती में अच्छी पैदावार का आधार केवल खाद या बीज नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत होती है। मिट्टी की सेहत को समझने का सबसे अहम पैमाना है उसका pH स्तर। कई बार किसान पूरी मेहनत और सही जैविक खाद डालने के बाद भी अपेक्षित उत्पादन नहीं ले पाते, क्योंकि मिट्टी का pH संतुलित नहीं होता।
इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि pH क्या होता है, जैविक खेती में इसका संतुलन क्यों जरूरी है और जैविक इनपुट्स कैसे प्राकृतिक रूप से मिट्टी का सही pH बनाए रखते हैं।
मिट्टी का pH क्या होता है?
pH मिट्टी की अम्लीय (Acidic) या क्षारीय (Alkaline) प्रकृति को दर्शाता है।
pH का मान 0 से 14 के बीच होता है:
- pH 7 = तटस्थ (Neutral)
- 7 से कम = अम्लीय मिट्टी
- 7 से अधिक = क्षारीय मिट्टी
अधिकांश फसलों के लिए pH 6.0 से 7.5 सबसे उपयुक्त माना जाता है।
जैविक खेती में pH संतुलन क्यों जरूरी है?
1. पोषक तत्वों का अवशोषण
अगर मिट्टी का pH सही नहीं है, तो:
- खाद मौजूद होने के बावजूद पौधे उसे नहीं ले पाते
- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश जैसे तत्व निष्क्रिय हो जाते हैं
संतुलित pH में पौधे पोषक तत्वों को आसानी से吸收 करते हैं।
2. मिट्टी के जीवों की सक्रियता
जैविक खेती सूक्ष्म जीवों पर निर्भर करती है।
गलत pH होने पर:
- लाभकारी जीवाणु निष्क्रिय हो जाते हैं
- जैविक खाद का असर कम हो जाता है
3. फसल की बढ़वार और गुणवत्ता
pH असंतुलन से:
- पौधों की जड़ें कमजोर
- पत्तियाँ पीली
- उत्पादन और गुणवत्ता दोनों कम
pH असंतुलन के मुख्य कारण
- लगातार रासायनिक खादों का उपयोग
- एक ही फसल बार-बार लेना
- अत्यधिक सिंचाई या जलभराव
- मिट्टी में जैविक पदार्थ की कमी
जैविक इनपुट्स मिट्टी का pH कैसे संतुलित रखते हैं?
1. जैविक खाद (गोबर खाद, कम्पोस्ट)
ये खाद:
- मिट्टी की बफर क्षमता बढ़ाती हैं
- pH को अचानक ऊपर-नीचे नहीं होने देतीं
- धीरे-धीरे संतुलन बनाती हैं
2. वर्मी कम्पोस्ट
वर्मी कम्पोस्ट:
- pH को स्थिर रखने में मदद करता है
- अम्लीय और क्षारीय दोनों मिट्टी में उपयोगी
- सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाता है
3. हरी खाद (सनहेम्प, ढैंचा)
हरी खाद:
- मिट्टी की अम्लीयता कम करती है
- कार्बनिक पदार्थ बढ़ाकर संतुलन लाती है
4. जीवामृत और पंचगव्य
ये तरल जैविक इनपुट:
- सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करते हैं
- मिट्टी में प्राकृतिक संतुलन बनाते हैं
- pH को धीरे-धीरे सही दिशा में लाते हैं
अम्लीय और क्षारीय मिट्टी के लिए जैविक समाधान
अम्लीय मिट्टी (Low pH)
लक्षण:
- पत्तियाँ पीली
- जड़ें कमजोर
जैविक उपाय:
- गोबर खाद और कम्पोस्ट
- हरी खाद
- लकड़ी की राख (सीमित मात्रा)
क्षारीय मिट्टी (High pH)
लक्षण:
- सफेद परत
- पौधों की बढ़वार धीमी
जैविक उपाय:
- जैविक खाद की नियमित मात्रा
- हरी खाद
- जैव उर्वरक
pH संतुलन के फायदे
- खाद का पूरा लाभ मिलता है
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
- फसल रोग-प्रतिरोधी बनती है
- उत्पादन स्थिर और गुणवत्तापूर्ण होता है
किसानों के लिए व्यावहारिक सुझाव
- हर 2–3 साल में मिट्टी परीक्षण कराएं
- एक ही फसल लगातार न लें
- जैविक खाद नियमित रूप से डालें
- अचानक भारी मात्रा में कोई भी इनपुट न डालें
निष्कर्ष
जैविक खेती में pH संतुलन रीढ़ की हड्डी की तरह है। बिना सही pH के न तो जैविक खाद असर दिखा पाएगी और न ही फसल अपनी पूरी क्षमता तक बढ़ पाएगी। जैविक इनपुट्स मिट्टी को नुकसान पहुँचाए बिना प्राकृतिक रूप से pH संतुलन बनाए रखते हैं।
अगर किसान pH को समझकर जैविक खेती करें, तो उन्हें स्वस्थ मिट्टी, बेहतर फसल और टिकाऊ खेती का लाभ जरूर मिलेगा।
