जैविक खेती और मिट्टी में कार्बन संचयन
– जैविक खाद (जैविक खाद/जैविक उर्वरक) कैसे प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करती है
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की गंभीर समस्या से जूझ रही है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़—इन सबका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। ऐसे समय में जैविक खेती (Organic Farming) केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक प्रभावी समाधान बनकर उभर रही है।
इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि मिट्टी में कार्बन संचयन (Soil Carbon Sequestration) क्या होता है, जैविक खाद इसमें कैसे मदद करती है और यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन से लड़ने में कैसे सहायक है।
मिट्टी में कार्बन संचयन क्या है?
कार्बन संचयन का अर्थ है:
वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को मिट्टी में सुरक्षित रूप से संग्रहित करना।
पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से:
- हवा से CO₂ लेते हैं
- उसे जैविक पदार्थ में बदलते हैं
- और अंततः मिट्टी में जमा कर देते हैं
जब यह कार्बन लंबे समय तक मिट्टी में बना रहता है, तो इसे मिट्टी का कार्बन संचयन कहा जाता है।
जलवायु परिवर्तन और खेती का संबंध
- रासायनिक खेती से मिट्टी का जैविक कार्बन घटता है
- मिट्टी बंजर और कठोर होती जाती है
- अधिक CO₂ वातावरण में लौट जाती है
इससे:
- तापमान बढ़ता है
- फसलों पर तनाव बढ़ता है
- उत्पादन अनिश्चित हो जाता है
जैविक खेती कैसे अलग है?
जैविक खेती में:
- जैविक खाद (गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट)
- हरी खाद
- फसल अवशेषों का उपयोग
इन सबके कारण:
- मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है
- मिट्टी जीवित और सक्रिय बनती है
जैविक खाद और कार्बन संचयन का विज्ञान
1. जैविक खाद – कार्बन का प्राकृतिक स्रोत
जैविक खाद में:
- कार्बन की मात्रा अधिक होती है
- यह मिट्टी में मिलकर ह्यूमस बनाती है
ह्यूमस:
- कार्बन को वर्षों तक सुरक्षित रखता है
- मिट्टी को काला, भुरभुरा और उपजाऊ बनाता है
2. मिट्टी के सूक्ष्म जीवों की भूमिका
जैविक खाद:
- बैक्टीरिया
- फफूंद
- केंचुए
इन सभी की संख्या बढ़ाती है।
ये सूक्ष्म जीव:
- जैविक पदार्थ को स्थायी कार्बन रूप में बदलते हैं
- CO₂ के दोबारा निकलने की गति कम करते हैं
3. फसल अवशेष और जड़ें
जैविक खेती में:
- फसल के अवशेष मिट्टी में मिलाए जाते हैं
- जड़ें मिट्टी में ही सड़कर कार्बन जोड़ती हैं
यह भूमिगत कार्बन भंडारण का सबसे मजबूत तरीका है।
जैविक खाद जलवायु परिवर्तन से कैसे लड़ती है?
1. CO₂ को वातावरण से कम करती है
- अधिक कार्बन मिट्टी में बंद
- वातावरण में ग्रीनहाउस गैस कम
2. मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाती है
- सूखे में नमी बनाए रखती है
- बाढ़ में जल निकास सुधारती है
इससे चरम मौसम का प्रभाव कम होता है।
3. कम ऊर्जा, कम प्रदूषण
- जैविक खाद स्थानीय रूप से बनती है
- रासायनिक खाद जैसी ऊर्जा खपत नहीं
इससे अप्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन भी घटता है।
रासायनिक खेती बनाम जैविक खेती (कार्बन दृष्टि से)
| विषय | रासायनिक खेती | जैविक खेती |
| मिट्टी कार्बन | घटता है | बढ़ता है |
| CO₂ उत्सर्जन | अधिक | कम |
| मिट्टी जीवन | नष्ट | सक्रिय |
| दीर्घकालीन असर | नकारात्मक | सकारात्मक |
किसानों के लिए व्यावहारिक उपाय
1. हर साल जैविक खाद का प्रयोग
- गोबर खाद
- वर्मी कम्पोस्ट
- कम्पोस्ट
2. हरी खाद अपनाएं
- ढैंचा
- सनई
- लोबिया
3. मिट्टी को खाली न छोड़ें
- कवर क्रॉप लगाएं
- मल्चिंग करें
छोटे किसानों के लिए विशेष लाभ
- कम लागत
- स्थानीय संसाधनों का उपयोग
- लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
भारत में जैविक खेती और भविष्य
भारत में:
- बड़ी मात्रा में कृषि अवशेष
- पशुधन आधारित संसाधन
यदि सही उपयोग हो, तो:
- खेती भी चले
- पर्यावरण भी बचे
- और जलवायु परिवर्तन का असर भी घटे
निष्कर्ष
जैविक खेती केवल रसायन छोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि यह मिट्टी में कार्बन को वापस लाने की प्रक्रिया है। जैविक खाद मिट्टी को कार्बन का सुरक्षित घर बनाती है, जिससे वातावरण स्वच्छ होता है और खेती टिकाऊ बनती है।
मिट्टी में कार्बन बढ़ाना = खेती बचाना + जलवायु बचाना। 🌍🌱
