Organic Fertilizers for Poor and Degraded Soils

कमजोर और बंजर होती मिट्टी के लिए जैविक खाद

जैविक खाद और जैवइनपुट्स से कम उपजाऊ जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने की प्रक्रिया

आज भारत में लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि कम उपजाऊ, सख्त या बंजर होती जा रही है। लगातार रासायनिक खादों का उपयोग, फसल चक्र का अभाव, मिट्टी कटाव और पानी की कमी ने मिट्टी की प्राकृतिक शक्ति को कमजोर कर दिया है। ऐसी भूमि पर फसल उगाना किसानों के लिए चुनौती बन चुका है।
इस समस्या का सबसे टिकाऊ समाधान है – जैविक खाद (Jaivik Khad) और जैवइनपुट्स का सही उपयोग

इस लेख में हम आसान और व्यावहारिक भाषा में जानेंगे कि कमजोर और खराब मिट्टी को जैविक खाद की मदद से कैसे दोबारा जीवित और उपजाऊ बनाया जा सकता है।


खराब और कम उपजाऊ मिट्टी की पहचान कैसे करें?

अगर आपकी खेत की मिट्टी में ये लक्षण दिखाई दें, तो समझिए कि मिट्टी कमजोर हो चुकी है:

  • मिट्टी सख्त और दरारदार हो
  • पानी जल्दी बह जाए या रुक न पाए
  • फसल की जड़ें ठीक से न फैलें
  • पैदावार हर साल घटती जाए
  • अधिक खाद देने पर भी फसल कमजोर रहे

ऐसी मिट्टी को रासायनिक खाद से नहीं, बल्कि जैविक उपचार से ही सुधारा जा सकता है।


जैविक खाद कमजोर मिट्टी के लिए क्यों जरूरी है?

जैविक खाद सिर्फ पौधों को पोषण नहीं देती, बल्कि:

  • मिट्टी की संरचना सुधारती है
  • लाभकारी जीवाणुओं को बढ़ाती है
  • पानी रोकने की क्षमता बढ़ाती है
  • मिट्टी को दोबारा जीवित बनाती है

यह प्रक्रिया धीरे होती है, लेकिन इसके परिणाम लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं।


कमजोर और बंजर मिट्टी सुधारने में जैविक खाद की भूमिका

1. मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाना

कमजोर मिट्टी में सबसे बड़ी कमी होती है कार्बनिक पदार्थ (Organic Matter) की।
गोबर खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में मिलकर:

  • मिट्टी को नरम और भुरभुरा बनाते हैं
  • पोषक तत्वों को पकड़कर रखते हैं

लगातार जैविक खाद डालने से मिट्टी की जान वापस आती है।


2. मिट्टी में सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करना

जैव-इनपुट्स जैसे:

  • जीवामृत
  • घन जीवामृत
  • पंचगव्य
  • जैव उर्वरक

मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को सक्रिय करते हैं। ये जीव:

  • मिट्टी के पोषक तत्वों को घुलनशील बनाते हैं
  • पौधों को धीरे-धीरे भोजन देते हैं

3. सख्त मिट्टी को ढीला बनाना

खराब मिट्टी अक्सर इतनी सख्त हो जाती है कि:

  • पानी अंदर नहीं जाता
  • जड़ें फैल नहीं पातीं

जैविक खाद और केंचुओं की गतिविधि से मिट्टी:

  • ढीली और हवादार बनती है
  • जड़ों के विकास के लिए अनुकूल होती है

जैविक खाद और जैवइनपुट्स का सही चयन

1. गोबर खाद और कम्पोस्ट

  • हर प्रकार की कमजोर मिट्टी के लिए उपयोगी
  • खेत की तैयारी के समय डालें
  • मिट्टी की आधारभूत उर्वरता सुधारती है

2. वर्मी कम्पोस्ट

  • तेजी से असर दिखाती है
  • जड़ विकास और फसल की मजबूती बढ़ाती है
  • सब्जी और नकदी फसलों के लिए उपयुक्त

3. हरी खाद (ढैंचा, सनई, सनहेम्प)

  • मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती है
  • बंजर जमीन सुधारने में बहुत प्रभावी
  • फसल से पहले खेत में पलट दें

4. जैव उर्वरक

  • राइजोबियम, पीएसबी, एजोटोबैक्टर
  • कम पोषक तत्व वाली मिट्टी के लिए जरूरी
  • बीज उपचार या मिट्टी में मिलाकर दें

चरणबद्ध तरीका: खराब मिट्टी को सुधारने की योजना

पहला वर्ष

  • भारी मात्रा में गोबर खाद या कम्पोस्ट
  • हरी खाद का उपयोग
  • तरल जैविक खाद का छिड़काव

दूसरा वर्ष

  • वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरक
  • फसल चक्र अपनाएं
  • मल्चिंग करें

तीसरा वर्ष

  • मिट्टी परीक्षण कराएं
  • जैविक खाद की मात्रा संतुलित करें
  • मिट्टी की संरचना स्थिर हो जाती है

जैविक सुधार के लाभ

  • मिट्टी फिर से उपजाऊ बनती है
  • पैदावार में स्थायी वृद्धि
  • सिंचाई की जरूरत कम
  • खेती की लागत घटती है
  • भूमि का मूल्य बढ़ता है

किसानों के लिए उपयोगी सुझाव

  • एक बार में चमत्कार की उम्मीद न करें
  • नियमित रूप से जैविक खाद डालें
  • मिट्टी को खाली न छोड़ें
  • रासायनिक खाद का उपयोग धीरे-धीरे कम करें

निष्कर्ष

कमजोर और खराब मिट्टी कोई अभिशाप नहीं है। सही जानकारी और जैविक खाद जैवइनपुट्स के नियमित उपयोग से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है। जैविक खेती मिट्टी को सिर्फ आज नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखती है।

अगर आप सच में अपनी जमीन को फिर से जीवित देखना चाहते हैं, तो जैविक खाद को अपनाना ही सबसे सही रास्ता है।