The Role of Women Farmers in Promoting Organic Agriculture

जैविक कृषि को बढ़ावा देने में महिला किसानों की भूमिका

भारत की कृषि व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है, लेकिन ऑर्गेनिक खेती (जैविक कृषि) के क्षेत्र में उनका योगदान और भी अधिक प्रभावशाली है।
महिलाएँ खेती को सिर्फ उत्पादन का साधन नहीं मानतीं, बल्कि मिट्टी, भोजन और परिवार की सेहत से जुड़ी एक जिम्मेदारी समझती हैं।
इसी वजह से आज भारत की जैविक खेती की सफलता में महिलाओं का योगदान सबसे आगे है।

इस लेख में हम समझेंगे कि महिलाएँ कैसे जैविक कृषि को आगे बढ़ा रही हैं और क्यों उनकी भूमिका भविष्य की टिकाऊ खेती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


🌿 1. प्रकृतिआधारित खेती में महिलाओं की विशेष रूचि

महिलाएँ स्वभाव से पर्यावरण, प्रकृति और संसाधनों के संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देती हैं।
इसी कारण वे रसायनों की बजाय:
✔ कंपोस्ट
✔ वर्मी-कंपोस्ट
✔ जैविक कीटनाशक
✔ पारंपरिक बीज

का उपयोग करना पसंद करती हैं।
इनकी देखभाल में धैर्य और निरंतरता की जरूरत होती है, जो महिलाओं की विशेषता है।


🌿 2. घरेलू कचरे से जैविक खाद बनाने में अग्रणी

महिलाएँ घर और खेत दोनों जगह जैविक कचरे का सही उपयोग करके:

  • कंपोस्ट
  • रसोई कचरा खाद
  • जीवामृत और घन जीवामृत

बनाने में निपुण होती हैं।
इससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और खेती की लागत भी कम होती है।


🌿 3. बीज संरक्षण और पारंपरिक किस्मों की रखवाली

कई ग्रामीण महिलाएँ अभी भी देशी बीजों का संरक्षण करती हैं, जैसे:
✔ बाजरा
✔ ज्वार
✔ अरहर
✔ कोदो
✔ देसी सब्ज़ियों के बीज

ये बीज रसायनों के बिना भी अच्छे परिणाम देते हैं और जलवायु परिवर्तन के समय भी टिकाऊ रहते हैं।
यही बीज भविष्य की जैविक खेती की नींव हैं।


🌿 4. खेत प्रबंधन और कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका

महिलाएँ खेत में:

  • पंक्तियों की सफाई
  • खरपतवार निकालना
  • कीटों के अंडों की पहचान
  • जैविक स्प्रे छिड़कना

जैसे काम में ज्यादा सावधानी बरतती हैं।
इससे फसलें स्वच्छ और रसायन-मुक्त रहती हैं।


🌿 5. महिला किसान समूह और सेल्फहेल्प ग्रुप (SHGs)

कई राज्यों में महिलाएँ SHG और किसान समूह बनाकर:

  • वर्मी कम्पोस्ट बनाती हैं
  • ऑर्गेनिक खाद बेचती हैं
  • ऑर्गेनिक सब्ज़ियाँ और फल मार्केट में सप्लाई करती हैं

इनकी आय बढ़ती है और स्थानीय किसानों को भी फायदा होता है।

उदाहरण:
केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तराखंड की महिला SHGs जैविक खेती में राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल बन चुकी हैं।


🌿 6. स्वास्थ्यसुरक्षित भोजन को बढ़ावा

महिलाएँ परिवार की सेहत के लिए जैविक भोजन पर विशेष ध्यान देती हैं।
वे अपनी खेती में रसायन न उपयोग करके:
✔ बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान
✔ पोषण युक्त भोजन
✔ सुरक्षित भोजन संस्कृति

को बढ़ावा देती हैं।


🌿 7. ऑर्गेनिक मार्केटिंग में नई दिशा

आज कई महिलाएँ:

  • सोशल मीडिया
  • लोकल फूड मार्केट
  • किसान मेलों
  • ऑर्गेनिक फैमर्स आउटलेट

के माध्यम से जैविक उत्पाद बेच रही हैं।
इससे उन्हें सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिलता है और उनकी आय भी बढ़ती है।


🌿 8. जलवायु परिवर्तन से लड़ने में अग्रणी

जैविक खेती:
✔ मिट्टी को स्वस्थ बनाती है
✔ कार्बन उत्सर्जन कम करती है
✔ जल संरक्षण बढ़ाती है

महिलाएँ इन तरीकों को अपनाकर खेती को जलवायुस्मार्ट बना रही हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

महिला किसान भारत की जैविक खेती की रीढ़ हैं।
वे:
🌱 मिट्टी की रक्षा करती हैं
🌱 पोषक भोजन पैदा करती हैं
🌱 लागत घटाती हैं
🌱 टिकाऊ खेती अपनाती हैं
🌱 समाज और परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा करती हैं

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से भारत भविष्य में ऑर्गेनिक खेती का वैश्विक नेतृत्व कर सकता है।
वे केवल किसान ही नहीं, बल्कि परियावरण संरक्षक और जैविक कृषि की असली चैंपियन हैं।