मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद (Green Manure) फसलें – एक संपूर्ण मार्गदर्शिका
खेती की सफलता का मूल आधार है उपजाऊ मिट्टी (Fertile Soil)।
अगर मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर और जीवंत है, तो फसलें अपने आप अच्छी होती हैं।
इसी मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का सबसे सस्ता और प्राकृतिक तरीका है — हरी खाद (Green Manure Crops)।
आइए जानते हैं कि हरी खाद क्या होती है, यह कैसे काम करती है, और किसान इसका उपयोग करके कैसे मिट्टी की सेहत सुधार सकते हैं।
✅ 1. हरी खाद (Green Manure) क्या है?
हरी खाद ऐसी फसलों को कहते हैं जिन्हें विशेष रूप से मिट्टी में जुताई करके सड़ने के लिए छोड़ा जाता है ताकि वे मिट्टी को जैविक तत्वों, नाइट्रोजन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध कर सकें।
साधारण शब्दों में —
“हरी खाद फसलों की जगह मिट्टी का पोषण करती है।”
✅ 2. हरी खाद का उद्देश्य और लाभ
🌿 मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना:
हरी खाद सड़ने पर मिट्टी में जैविक कार्बन और नाइट्रोजन जोड़ती है, जिससे फसलों को प्राकृतिक पोषण मिलता है।
🌿 मिट्टी की संरचना सुधारना:
ये फसलें मिट्टी को मुलायम और भुरभुरी बनाती हैं, जिससे जड़ों को हवा और पानी आसानी से मिल पाता है।
🌿 जैविक पदार्थ की वृद्धि:
हरी खाद मिट्टी में ह्यूमस (Humus) बनाती है, जो दीर्घकालिक उर्वरता का आधार है।
🌿 नमी संरक्षण:
हरी खाद वाली मिट्टी पानी को अधिक समय तक रोकती है — सूखे समय में भी फसलें सुरक्षित रहती हैं।
🌿 रोग और कीट नियंत्रण:
नीम, ढैंचा और सनई जैसी फसलें मिट्टी में हानिकारक कीटों और फफूंद को नियंत्रित करती हैं।
✅ 3. भारत में प्रमुख हरी खाद फसलें
| फसल का नाम | विशेषता | उपयोग का समय |
| ढैंचा (Dhaincha) | नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सर्वश्रेष्ठ | खरीफ से पहले |
| सनई (Sunhemp) | जल्दी बढ़ने वाली और मिट्टी सुधारक | खरीफ व रबी दोनों में |
| मूंग/उड़द (Moong/Urad) | दाल वर्गीय पौधे, नाइट्रोजन प्रदान करते हैं | फसल के बीच में |
| क्लोवर (Clover) | ठंडी जगहों में उपयुक्त | रबी सीजन |
| नीम और मेथी | कीट नियंत्रण और उर्वरता बढ़ाने में मददगार | सालभर |
| बरसीम (Berseem) | पशु चारा और हरी खाद दोनों के लिए | सर्दी के मौसम में |
✅ 4. हरी खाद कैसे तैयार करें (Method of Use)
🌱 Step 1: बीज बुवाई
- खेत की जुताई करें और हरी खाद की फसल बोएँ (जैसे ढैंचा या सनई)।
- 20–25 किलो बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है।
🌱 Step 2: बढ़ने दें (30–45 दिन)
- पौधों को 1.5 से 2 फीट तक बढ़ने दें ताकि पर्याप्त हरी जैविक मात्रा तैयार हो सके।
🌱 Step 3: मिट्टी में मिलाना
- फूल आने से पहले पौधों को ट्रैक्टर या हल से जुताई कर मिट्टी में मिला दें।
- 15–20 दिन तक सड़ने दें, फिर अगली फसल बोएँ।
✅ 5. किन फसलों के साथ हरी खाद लाभदायक है
- धान (Rice) – ढैंचा और सनई सर्वोत्तम।
- गेहूँ (Wheat) – बरसीम और क्लोवर।
- गन्ना (Sugarcane) – मूंग और उड़द।
- सब्ज़ियाँ – नीम पत्ती या हरी मेथी से बनी खाद।
✅ 6. हरी खाद बनाम रासायनिक खाद
| बिंदु | हरी खाद | रासायनिक खाद |
| पोषण स्रोत | प्राकृतिक | कृत्रिम |
| लागत | बहुत कम | बहुत अधिक |
| मिट्टी पर प्रभाव | दीर्घकालिक सुधार | धीरे-धीरे नुकसान |
| पर्यावरण | सुरक्षित | प्रदूषण फैलाने वाला |
✅ 7. निष्कर्ष
हरी खाद खेती की वह प्राकृतिक शक्ति है जो बिना खर्च के मिट्टी को जीवंत और उपजाऊ बनाती है।
ढैंचा, सनई और मूंग जैसी फसलों को अपनाकर किसान रासायनिक खाद पर निर्भरता घटा सकते हैं, मिट्टी की उर्वरता बढ़ा सकते हैं और आने वाली फसलों से बेहतर उत्पादन पा सकते हैं।
“हरी खाद – मिट्टी की सेहत का सबसे सस्ता और स्थायी इलाज।” 🌿
